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सम्पूर्णा द्वारा बांग्लादेश में हिंदू युवक की निर्मम हत्या की कड़ी निंदा

बांग्लादेश में हिंदू समाज के एक निर्दोष युवक की भीड़ द्वारा की गई निर्मम हत्या, आगजनी एवं निरंतर हो रहे अत्याचारों की घटनाओं को लेकर सम्पूर्णा की संस्थापिका डॉ. शोभा विजेन्द्र ने गहरा शोक एवं आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इस अमानवीय घटना को मानवता पर कलंक बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की।


डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में धर्म या पहचान के आधार पर हिंसा और हत्या पूर्णतः अस्वीकार्य है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदू समाज पर हो रहे लगातार अत्याचार केवल एक देश का आंतरिक विषय नहीं हैं, बल्कि यह मानवाधिकारों से जुड़ा एक गंभीर वैश्विक मुद्दा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी संवेदनशीलता के साथ संज्ञान लेना चाहिए।


इसी क्रम में, सम्पूर्णा, राष्ट्रीय परशुराम परिषद, दिल्ली प्रदेश एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं द्वारा मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 को सायं 5 बजे से 7 बजे तक एक शांतिपूर्ण रोष-प्रदर्शन एवं धरने का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शन में माताओं, बहनों, युवाओं एवं बड़ी संख्या में जागरूक नागरिकों ने सहभागिता करते हुए लोकतांत्रिक एवं पूर्णतः अहिंसक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।


प्रदर्शन के दौरान सभी सहभागी सम-विहार अपार्टमेंट, सेक्टर–13, रोहिणी से एकत्रित होकर शांतिपूर्वक पदयात्रा करते हुए डी.सी. चौक, रोहिणी तक पहुँचे। वहाँ प्रतीकात्मक रूप से अत्याचार और अन्याय के विरोध में पुतला-दहन किया गया, जिसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि धर्म के आधार पर की गई हिंसा, हत्या एवं उत्पीड़न किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।


इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू समाज पर हो रहे अत्याचार मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं तथा इस विषय पर मानवाधिकार आयोग को औपचारिक पत्र लिखकर तत्काल संज्ञान लेने का आग्रह किया जाएगा।


उन्होंने समाज को सचेत करते हुए “Know Your Neighbour” का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने आसपास की गतिविधियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, सामाजिक ताने-बाने को समझना चाहिए और किसी भी प्रकार की कट्टरता या हिंसक मानसिकता को समय रहते पहचानना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज समय रहते सतर्क नहीं हुआ, तो ऐसी घटनाएँ भविष्य में हमारे लिए भी एक गंभीर चुनौती बन सकती हैं।


डॉ. शोभा विजेंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं है; आवश्यक है कि हम संवैधानिक, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण मार्ग से अपनी आवाज़ उठाएँ तथा मानवता, न्याय एवं शांति के मूल्यों की रक्षा करें।


प्रदर्शन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समाज पीड़ितों के साथ एकजुट होकर खड़ा रहेगा और मानवाधिकारों के संरक्षण हेतु निरंतर एवं संगठित प्रयास करता रहेगा।