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“जल है तो कल है” – जल संरक्षण को जनांदोलन बनाने का संकल्प

“जल है तो कल है” – जल संरक्षण को जनांदोलन बनाने का संकल्प

सम्पूर्णा द्वारा अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के सहयोग से आज अर्हम भवन, हम्पी नगर, विजयनगर, बैंगलोर में जल संरक्षण एवं जल निकायों के पुनर्जीवन विषय पर एक प्रभावशाली जल संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ “जल है तो कल है” के उद्घोष के साथ हुआ, जिसने पूरे सभागार में जागरूकता और संकल्प का वातावरण निर्मित किया। इस अवसर पर माननीय श्री यू. टी. खादर फ़रीद, अध्यक्ष, कर्नाटक विधान सभा, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को नई दिशा और प्रेरणा प्रदान की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “बेंगलुरु के जल निकाय केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर हैं। उनका संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार ठोस नीतिगत कदम उठाएगी और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से इनका पुनर्जीवन सुनिश्चित किया जाएगा। नारी शक्ति का इस दिशा में योगदान सराहनीय है और सरकार हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं समाज में जागरूकता फैलाने की सबसे प्रभावी शक्ति हैं और उनके प्रयासों से जल संरक्षण एक जनांदोलन का रूप ले सकता है। महिलाओं के नेतृत्व में कई स्वयंसेवी संगठन सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। सरकार इन प्रयासों को और सशक्त बनाने के लिए विशेष योजनाएं और संसाधन उपलब्ध कराएगी। कार्यक्रम का संचालन सम्पूर्णा संस्थापिका डॉ. शोभा विजेन्द्र ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “जल ही जीवन है और इसका संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। समाज, सरकार और नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।” इस अवसर पर विशिष्ट वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। श्रीमती बृंदा अडिगे, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद्, ने कहा कि जल संरक्षण को तकनीकी मुद्दा मानने के बजाय इसे नैतिक और सामाजिक आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने कहा, “नारी शक्ति सबसे बड़ी प्रेरक है। यदि महिलाएं संगठित होकर आगे आएं, तो यह आंदोलन व्यापक जनजागरण का स्वरूप ले सकता है।“प्रो. बिनीशा पयाट्टी, कार्यकारी निदेशक, इंटरनेशनल वेस्ट मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट, ने कहा कि जल स्रोतों की सफाई और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कड़े कानून, सामुदायिक भागीदारी और मजबूत सरकारी निगरानी की आवश्यकता है। श्रीमती देवांगी स्वर्णकार, अतिरिक्त आयकर आयुक्त, ने पारदर्शिता और उत्तरदायित्व पर जोर देते हुए कहा, “योजनाओं का सही क्रियान्वयन और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ही जल संकट का स्थायी समाधान है।” डॉ. के.आर. श्री हर्षा, सदस्य, सलाहकार समिति, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, ने अपने शोधपत्र के माध्यम से बताया कि पारंपरिक जल स्रोतों का वैज्ञानिक तकनीकों से पुनर्जीवन और वर्षा जल संरक्षण बैंगलोर की जल समस्या का दीर्घकालिक समाधान है। श्री वेंकटेश संघनाल, पर्यावरणविद्, ने वर्षा जल संचयन को शहरी जीवन का अनिवार्य अंग बनाने पर बल देते हुए इसे जल संकट से निपटने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय बताया।  आचार्य श्री महाश्रमण जी की शिष्या साध्वी श्री संयमलता जी की सौम्य उपस्थिति ने कार्यक्रम में आध्यात्मिकता का वातावरण निर्मित किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा, “जल भी एक जीवित तत्व है। इसका सम्मान और संरक्षण प्रत्येक मनुष्य का आध्यात्मिक कर्तव्य है।  कार्यक्रम का समापन अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की पूर्व महासचिव श्रीमती वीना बैद के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह पहल केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगी। हम जल संरक्षण को जनांदोलन बनाने का संकल्प लेते हैं।” राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जहां सभी प्रतिभागियों ने “जल है तो कल है” के संदेश को आगे बढ़ाने की शपथ ली। यह जल संवाद न केवल जल संकट पर जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि विभिन्न वर्गों को एक साझा मंच पर लाकर व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हुआ। बैंगलोर के जल निकायों के पुनर्जीवन और जल संरक्षण के लिए यह आयोजन आने वाले समय में सामूहिक प्रयासों की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया।  -----------------------------