संस्कार ही समृद्धि का मूल है, संस्कृति ही शक्ति का स्वरूप है
#Sampurna द्वारा संचालित 40 दिवसीय #balandmahilasanskarshivir के 38वें दिवस का आयोजन 8 जुलाई 2025, मंगलवार को सम्पूर्णा परिसर, रजापुर, सेक्टर-9, रोहिणी में आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह शिविर निरंतर नारी चेतना और बाल मन की संवेदनाओं को छूते हुए उन्हें भारतीय मूल्यों और आत्मिक उन्नयन से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।
दिन की शुरुआत प्रातः 11:00 बजे सामूहिक प्रार्थना से हुई, जिसमें उपस्थित सभी सहभागी भावविभोर होकर एकात्मता के भाव में लीन हो गए। यह केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि आत्मा और सृष्टि के बीच का एक गूढ़ संवाद था, जो वातावरण में शांति और श्रद्धा का स्पंदन भर गया।
इसके पश्चात 11:10 बजे आयोजित मंत्रोच्चारण ने सम्पूर्ण परिसर को दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। शुद्ध ध्वनियों की गूंज ने मानसिक एकाग्रता और आत्मिक बल का संचार किया, जिससे हर आयु वर्ग के सहभागी लाभान्वित हुए।
दोपहर 12:00 बजे प्रारंभ हुए संकीर्तन ने पूरे परिसर को भक्ति रस में डुबो दिया। भजन और वाद्यों की लयबद्ध स्वर लहरियों में बच्चों की किलकारियाँ, माताओं की श्रद्धा और साधकों की समर्पण भावना जैसे एक सुर में मिल गईं। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक साधना की अनुभूति थी—एक ऐसा क्षण जहाँ मन, मस्तिष्क और आत्मा—all became one in rhythm and devotion.
यह दिन #balandmahilasanskarshivir की उस साधना यात्रा का सशक्त हिस्सा रहा, जहाँ प्रतिदिन संस्कारों की एक नई परत जुड़ती है। सम्पूर्णा का यह प्रयास मातृशक्ति को सृजन का आशीर्वाद और बाल चेतना को जिम्मेदार भविष्य का दर्शन देने हेतु सतत रूप से सक्रिय है। 8 जुलाई का यह दिवस भी उसी भावना का प्रतीक बना,
जहासंस्कृति को स्वर मिला और आत्मा को ऊर्जा।
